Raebareli: जिला कारागार में निरुद्ध महिला बंदियों को आत्मनिर्भर बनाने और उनके कौशल विकास को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण पहल शुरू की गई है। एनटीपीसी ऊंचाहार की ओर से कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) के तहत महिला बंदियों के लिए मूंज शिल्पकला कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य महिला बंदियों को पारंपरिक शिल्पकला से जोड़कर उन्हें रोजगारपरक हुनर प्रदान करना है, जिससे वे भविष्य में अपने पैरों पर खड़ी हो सकें।
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि जिलाधिकारी सरनीत कौर ब्रोका रहीं। इस अवसर पर मुख्य विकास अधिकारी अंजुलता, एनटीपीसी ऊंचाहार के कार्यकारी निदेशक एवं परियोजना प्रमुख बिश्व मोहन सिंह सहित जेल प्रशासन के अधिकारी मौजूद रहे। अधिकारियों ने महिला बंदियों के कौशल विकास और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों को महत्वपूर्ण बताया।

मूंज से तैयार करेंगी उपयोगी और सजावटी सामान
प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान महिला बंदियों को मूंज शिल्पकला का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके अंतर्गत मूंज से विभिन्न प्रकार के उपयोगी और सजावटी सामान तैयार करने की कला सिखाई जाएगी। प्रशिक्षण के माध्यम से बंदियों को हस्तशिल्प निर्माण की बारीकियों से परिचित कराया जाएगा, ताकि वे अपनी रचनात्मक क्षमता का विकास कर सकें और एक उपयोगी कौशल हासिल करें।
इस पहल का उद्देश्य महिला बंदियों को केवल प्रशिक्षण तक सीमित रखना नहीं, बल्कि उन्हें भविष्य में आर्थिक रूप से सक्षम बनने के अवसर उपलब्ध कराना भी है। कौशल विकास के माध्यम से उनके पुनर्वास और समाज की मुख्यधारा में लौटने की प्रक्रिया को मजबूती मिल सकती है।
एनटीपीसी ऊंचाहार की ओर से सीएसआर के तहत शुरू किए गए इस कार्यक्रम को महिला बंदियों के लिए नई संभावनाओं के द्वार खोलने वाली पहल के रूप में देखा जा रहा है। प्रशिक्षण के जरिए बंदियों में आत्मविश्वास बढ़ाने और उन्हें हुनरमंद बनाने पर जोर दिया जाएगा।










