लखनऊ: चर्चित शिवा शर्मा प्रकरण में मुख्य आरोपी बताई जा रही श्रद्धा दुबे को लेकर लखनऊ पुलिस कमिश्नरेट में उठे सवालों ने मामले को नया मोड़ दे दिया है। 50 हजार रुपये की इनामी श्रद्धा दुबे का एएनआई (ANI) को इंटरव्यू कराए जाने के मामले को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। भारत समाचार की रिपोर्ट में इस मामले का खुलासा किए जाने के बाद पुलिस महकमे की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर इनामी श्रद्धा दुबे का इंटरव्यू किसके इशारे पर कराया गया और इसके पीछे किसकी भूमिका थी?
मामले को लेकर सवालों का सिलसिला अभी थमा भी नहीं था कि लखनऊ कमिश्नरेट में डीसीपी विक्रांत वीर को लाइन हाजिर किए जाने की खबर सामने आ गई। इस घटनाक्रम ने पूरे मामले को और अधिक चर्चा में ला दिया है। हालांकि, डीसीपी को लाइन हाजिर किए जाने के पीछे की आधिकारिक वजह और इंटरव्यू प्रकरण से उसके सीधे संबंध की पुष्टि आवश्यक है।

इंस्पेक्टर विक्रम सिंह पर भी हुई कार्रवाई
इससे पहले हजरतगंज थाने के इंस्पेक्टर विक्रम सिंह (Vikram Singh) को भी लाइन हाजिर कर दिया गया था। शिवा शर्मा (Shiva Sharma) प्रकरण में मृतक की मां रंजना शर्मा ने आरोप लगाया था कि इंस्पेक्टर विक्रम सिंह उनकी मदद कर रहे थे और मामले में कार्रवाई के लिए प्रयासरत थे। उन्होंने यह भी सवाल उठाया था कि कार्रवाई के बीच इंस्पेक्टर को आखिर क्यों हटाया गया।
इंस्पेक्टर विक्रम सिंह और डीसीपी विक्रांत वीर के खिलाफ हुई कार्रवाई के घटनाक्रम ने पुलिस विभाग के भीतर चल रही गतिविधियों को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि, दोनों अधिकारियों को लाइन हाजिर किए जाने के कारणों को लेकर आधिकारिक स्थिति स्पष्ट होना जरूरी है।
आखिर किसके इशारे पर चल रहा पूरा खेल?
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि श्रद्धा दुबे के इंटरव्यू की अनुमति किस स्तर पर दी गई थी? क्या इस संबंध में विभागीय स्तर पर कोई निर्णय हुआ था या किसी अन्य स्तर से निर्देश दिए गए थे? इन सवालों का जवाब जांच और आधिकारिक स्पष्टीकरण के बाद ही सामने आ सकेगा।
शिवा शर्मा प्रकरण पहले से ही सुर्खियों में है। ऐसे में इनामी आरोपी के इंटरव्यू और उसके बाद पुलिस अधिकारियों पर हुई कार्रवाई को लेकर लोगों की नजरें पुलिस प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हैं।
क्या श्रद्धा दुबे प्रकरण में उठे सवालों का जवाब सामने आएगा? क्या पुलिस महकमे में लाइन हाजिर होने वाले अधिकारियों की सूची और लंबी होगी? फिलहाल इन सवालों पर चर्चा तेज है। मामले में पारदर्शी जांच और आधिकारिक स्पष्टीकरण से ही पूरे घटनाक्रम की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।










