Asian Games: खेतों में मेहनत करने वाले किसान की बेटी ने अपनी लगन और वर्षों के अभ्यास के दम पर अंतरराष्ट्रीय खेल मंच पर पहचान बनाई है। सहारनपुर की एथलीट प्राची चौधरी ने एशियन गेम्स में पदक जीतकर अपने परिवार और जिले को गौरवान्वित किया है। उनकी इस उपलब्धि के पीछे वर्षों की मेहनत, परिवार का सहयोग और मुश्किल परिस्थितियों में भी अभ्यास जारी रखने का जज्बा रहा है।
दो पदक जीतकर लौटीं, स्वागत में उमड़ा उत्साह

प्राची चौधरी के लौटने की खबर से उनके परिवार और समर्थकों में खुशी का माहौल रहा। दिल्ली एयरपोर्ट पर उनका स्वागत ढोल-नगाड़ों और फूल-मालाओं के साथ किया गया। परिजनों ने उन्हें कंधों पर बैठाकर अपनी खुशी जाहिर की। उनकी सफलता पर लोगों ने बधाई देते हुए इसे सहारनपुर के लिए गर्व का क्षण बताया।
400 मीटर दौड़ में कांस्य, रिले में दिलाया स्वर्ण
एशियन गेम्स में प्राची ने दो अलग-अलग स्पर्धाओं में पदक हासिल किए। महिलाओं की 400 मीटर व्यक्तिगत दौड़ में उन्होंने 53.21 सेकंड का समय निकालकर कांस्य पदक जीता। इसके बाद 4×400 मीटर रिले में भारतीय टीम ने 3 मिनट 29.69 सेकंड में दौड़ पूरी कर स्वर्ण पदक अपने नाम किया। इस टीम में प्राची के साथ किरण पहल, एमआर पूवम्मा और विथ्या रामराज शामिल रहीं।
गोल्ड जीतने का वादा हुआ पूरा
प्राची ने अपनी खुशी साझा करते हुए कहा कि पिछली बार जब वह प्रतियोगिता के लिए गई थीं, तब उन्होंने अगली बार एशियन गेम्स से स्वर्ण पदक लेकर लौटने की बात कही थी। उस दौरान लोगों से मिले आशीर्वाद और प्रोत्साहन ने उनका हौसला बढ़ाया। प्राची के मुताबिक, आज वह अपना वादा पूरा कर लौटी हैं और इस उपलब्धि के लिए सभी का धन्यवाद करती हैं।
DSP बनने का सपना, पहले ही सिलवा ली थी वर्दी
प्राची चौधरी की खेल उपलब्धि के साथ उनकी एक और इच्छा चर्चा में है। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश सरकार की खेल पदक विजेताओं से जुड़ी नीति के तहत स्वर्ण पदक जीतने वाले खिलाड़ियों को डीएसपी पद दिए जाने का प्रावधान है। इसी उम्मीद के साथ वह पहले ही अपनी वर्दी सिलवाकर गई थीं। अब उनकी इच्छा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिलकर वर्दी पहनने की है। हालांकि, पद पर नियुक्ति संबंधित सरकारी नियमों और औपचारिक प्रक्रिया के अनुसार होगी।
स्टेडियम में शुरू हुआ सफर, परिवार ने दिया साथ
जिला क्रीड़ा अधिकारी राहुल चोपड़ा ने प्राची की सफलता पर प्रसन्नता जताई। उन्होंने बताया कि प्राची के पिता किसान हैं और सहारनपुर स्टेडियम में अभ्यास के दौरान प्रशिक्षकों ने उनकी प्रतिभा को पहचाना था। प्राची ने कई वर्षों तक स्थानीय स्टेडियम में मेहनत की और बाद में बेंगलुरु में भी प्रशिक्षण लिया। इस सफर में उनके माता-पिता और परिवार का महत्वपूर्ण योगदान रहा।
नौकरी के साथ खेल में भी आगे बढ़ीं
राहुल चोपड़ा के अनुसार, प्राची की मेहनत का परिणाम उनकी नौकरी और खेल उपलब्धियों में भी दिखाई दिया। उनकी रेलवे में नौकरी लगी और पिछले वर्ष उन्हें जिला युवा कल्याण एवं प्रादेशिक दल विकास अधिकारी के पद पर नियुक्ति मिली। अब एशियन गेम्स में स्वर्ण पदक जीतने के बाद डीएसपी बनने की उनकी उम्मीदों को लेकर चर्चा है।
अगला लक्ष्य वर्ल्ड चैंपियनशिप
प्राची अब अगले वर्ष होने वाली वर्ल्ड चैंपियनशिप में भारत का प्रतिनिधित्व करने के लक्ष्य के साथ आगे बढ़ना चाहती हैं। उन्होंने युवाओं और खासकर बेटियों के अभिभावकों से अपील की कि वे अपनी बेटियों को आगे बढ़ने का अवसर दें। प्राची का मानना है कि परिवार का साथ और निरंतर अभ्यास लड़कियों को अपने लक्ष्य तक पहुंचने का हौसला देता है। उनकी कहानी उन खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखते हैं।










