Ramgarh: झारखंड की मिट्टी में रची-बसी लोकसंस्कृति, पारंपरिक नृत्य और लोकगीतों की अनूठी छटा रामगढ़ जिले के मांडू प्रखंड स्थित बलिया गांव में देखने को मिली। उत्तरी करमा पंचायत के बलिया गांव के गांधी मैदान में वृक्ष रक्षा बंधन एवं जितिया पूजा के शुभ अवसर पर भव्य झूमर प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में आसपास के कई गांवों से पहुंचीं झूमर टीमों ने अपनी शानदार प्रस्तुतियों से माहौल को उत्सवमय बना दिया। पारंपरिक गीतों और नृत्य के माध्यम से कलाकारों ने झारखंड की सांस्कृतिक विरासत की खूबसूरती को सामने रखा।
विधायक निर्मल कुमार महतो मुख्य अतिथि के रूप में हुए शामिल

इस सांस्कृतिक आयोजन में मांडू विधायक निर्मल कुमार महतो मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। वहीं, झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (जेएलकेएम) के मांडू विधानसभा के पूर्व प्रत्याशी बिहारी कुमार महतो विशिष्ट अतिथि के तौर पर पहुंचे। अतिथियों की उपस्थिति में आयोजित प्रतियोगिता ने स्थानीय लोगों के बीच पारंपरिक कला और संस्कृति के प्रति उत्साह को और बढ़ाया। कार्यक्रम में झूमर की प्रस्तुतियां आकर्षण का प्रमुख केंद्र रहीं।
बिहारी कुमार महतो ने बताई झूमर प्रतियोगिता की अहमियत

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए बिहारी कुमार महतो ने कहा कि झारखंड की पारंपरिक रीति-रिवाज, वेशभूषा और सांस्कृतिक विरासत ही यहां के लोगों की विशिष्ट पहचान हैं। इन परंपराओं को केवल आयोजनों तक सीमित रखने के बजाय नई पीढ़ी तक पहुंचाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि करमा और जितिया जैसे पर्वों के अवसर पर झूमर प्रतियोगिताओं का आयोजन लोगों को अपनी जड़ों से जोड़े रखने का महत्वपूर्ण माध्यम बन सकता है।
नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति से जोड़ने की पहल
बिहारी कुमार महतो ने चिंता जताई कि बदलते समय के साथ बाहरी सांस्कृतिक प्रभाव बढ़ रहे हैं और नई पीढ़ी धीरे-धीरे अपनी पारंपरिक जीवनशैली और रीति-रिवाजों से दूर होती जा रही है। ऐसे में स्थानीय लोककला, पारंपरिक पहनावे और झारखंडी नृत्य-संगीत को प्रोत्साहित करना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि झूमर प्रतियोगिता जैसे आयोजन बच्चों और युवाओं को अपनी सांस्कृतिक विरासत को जानने, समझने और आगे बढ़ाने का अवसर देते हैं।
झूमर टीमों ने प्रस्तुत किए पारंपरिक लोकनृत्य
प्रतियोगिता में आसपास के कई गांवों की झूमर मंडलियों ने भाग लिया। कलाकारों ने पारंपरिक झूमर नृत्य और लोकगीतों के जरिए झारखंड की समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा का प्रदर्शन किया। ग्रामीण परिवेश में आयोजित इस कार्यक्रम ने लोगों को अपनी लोककला से जुड़ने का अवसर दिया। पर्व के उल्लास के बीच प्रस्तुतियों ने दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया और स्थानीय सांस्कृतिक परंपराओं की जीवंतता को दर्शाया।
आयोजन समिति के प्रयासों से सफल हुआ कार्यक्रम
इस भव्य आयोजन को सफल बनाने का श्रेय वृक्ष रक्षा बंधन एवं जितिया पूजा झूमर समिति को दिया गया। समिति के प्रयासों से गांव में सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित हुआ, जिसमें विभिन्न गांवों के कलाकारों को अपनी प्रतिभा दिखाने का मंच मिला। बलिया गांव का यह आयोजन इस बात को रेखांकित करता है कि स्थानीय स्तर पर होने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रम लोकपरंपराओं को जीवित रखने और आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।





