Raebareli: राना नगर से कानपुर रोड तक बदहाल ट्रैफिक व्यवस्था ने बढ़ाई मुश्किलें, जाम में फंसी एंबुलेंस; सीडीओ और न्यायाधीश भी हुए परेशान

Raebareli: अतिक्रमण, ई-रिक्शों की बेतरतीब पार्किंग और सड़क किनारे खड़े वाहनों से बिगड़े हालात, जिम्मेदारों की मौजूदगी के बावजूद कार्रवाई पर उठे सवाल

Raebareli: रायबरेली शहर की सड़कों पर बढ़ता अतिक्रमण और बेपटरी होती यातायात व्यवस्था अब आम जनता के लिए मुसीबत बनती जा रही है। राना नगर चौराहे से कानपुर रोड तक जिस मार्ग पर कभी जाम कोई बड़ी समस्या नहीं हुआ करता था, वहां अब रोजाना जाम लगना आम बात हो गई है। सड़क पर कब्जा जमाए फल के ठेले, बस स्टॉप की ओर जाने वाली सड़क के मोड़ पर कतारबद्ध ई-रिक्शे और बेतरतीब खड़े वाहन यातायात व्यवस्था की खुलेआम धज्जियां उड़ा रहे हैं।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस स्थान पर अतिक्रमण और ई-रिक्शों की वजह से यातायात प्रभावित हो रहा है, उसके आसपास पुलिस और यातायात पुलिस की मौजूदगी भी रहती है। इसके बावजूद कार्रवाई न होना कई सवाल खड़े करता है। क्या जिम्मेदारों को जाम दिखाई नहीं देता या फिर कार्रवाई करने में किसी तरह का दबाव आड़े आ रहा है?

वोट बैंक के आगे व्यवस्था बेबस?

स्थानीय लोगों का कहना है कि ठेले और ई-रिक्शा चालक भी मतदाता हैं। ऐसे में कार्रवाई करने से कहीं राजनीतिक नाराजगी न झेलनी पड़े, शायद इसी डर से जिम्मेदार आंखें मूंदे बैठे हैं। यदि यही स्थिति रही तो सड़कें जनता की सुविधा के लिए कम और वोट बैंक के संरक्षण के लिए ज्यादा नजर आएंगी।

गुरुवार को हालात उस समय और गंभीर हो गए, जब जाम में एक एंबुलेंस फंस गई। मरीज की जिंदगी से जुड़ी आपात सेवा के वाहन का जाम में फंसना यातायात व्यवस्था की गंभीर विफलता को उजागर करता है। यही नहीं, जिले की मुख्य विकास अधिकारी और लालगंज तहसील के ग्राम न्यायालय के न्यायाधीश भी इसी जाम की परेशानी से दो-चार हुए। जब जिम्मेदार अधिकारियों और न्यायिक अधिकारी तक जाम की चपेट में आ सकते हैं तो आम नागरिकों की स्थिति का अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है।

शहरवासियों का सवाल सीधा है—सड़क जनता के लिए है या वोट बैंक के लिए? प्रशासन और जनप्रतिनिधियों को इस सवाल का जवाब देना होगा। अतिक्रमण के खिलाफ अभियान केवल कागजों और दिखावे तक सीमित न रहकर जमीन पर दिखाई देना चाहिए।

रायबरेली की पहचान पोस्टर, होर्डिंग और नारों से नहीं, बल्कि साफ-सुथरी, अतिक्रमण मुक्त और सुगम सड़कों से होनी चाहिए। यदि समय रहते जिम्मेदार नहीं चेते तो आने वाले दिनों में जाम रायबरेली की समस्या नहीं, बल्कि शहर की पहचान बन जाएगा।

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