जम्मू-कश्मीर हाई कोर्ट की जुवेनाइल जस्टिस कमेटी व यूनिसेफ की साझेदारी में “बेटी बचाओ” पर राज्य स्तरीय परामर्श सम्मेलन

रिपोर्ट : शाह हिलाल

श्रीनगर : बेटियों के अधिकारों और सुरक्षा को सुनिश्चित करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए, जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख हाई कोर्ट की जुवेनाइल जस्टिस कमेटी ने, भारत के सर्वोच्च न्यायालय की जुवेनाइल जस्टिस कमेटी के संरक्षण में और यूनिसेफ के तकनीकी सहयोग से, “बेटी की सुरक्षा: एक सुरक्षित और सक्षम वातावरण की ओर” विषय पर राज्य स्तरीय परामर्श सम्मेलन आयोजित किया। यह कार्यक्रम शनिवार को श्रीनगर के मूमिनाबाद स्थित जम्मू-कश्मीर न्यायिक अकादमी में संपन्न हुआ।

सम्मेलन में न्यायाधीशों, नीति-निर्माताओं, सरकारी अधिकारियों, बाल अधिकार कार्यकर्ताओं और सिविल सोसाइटी के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। सभी ने इस बात पर जोर दिया कि बच्चियों के लिए सुरक्षित और अनुकूल माहौल तैयार करने के लिए सामूहिक प्रयासों की तत्काल आवश्यकता है।

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कार्यक्रम की अध्यक्षता माननीय मुख्य न्यायाधीश अरुण पाली ने की। मुख्य अतिथि के रूप में उनके साथ न्यायमूर्ति रजनेश ओसवाल (अध्यक्ष, न्यायिक अकादमी), न्यायमूर्ति सिंदू शर्मा (अध्यक्ष, जुवेनाइल जस्टिस कमेटी), न्यायमूर्ति मोहम्मद अक़रम चौधरी और न्यायमूर्ति जावेद इक़बाल वानी मौजूद रहे। यूनिसेफ इंडिया की ओर से विजयलक्ष्मी अरोड़ा, चाइल्ड प्रोटेक्शन स्पेशलिस्ट, भी कार्यक्रम में शामिल हुईं।

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इस अवसर पर सैयद मुजतबा की लड़कियों की शिक्षा पर आधारित पुस्तक का विमोचन भी किया गया, जिसे शिक्षा को लैंगिक समानता और महिला सशक्तिकरण का आधार बताते हुए सराहा गया।

अपने मुख्य भाषण में मुख्य न्यायाधीश अरुण पाली ने कहा— “शिक्षा ही वह सबसे सशक्त साधन है, जो असमानता की जंजीरों को तोड़ सकती है। कोई भी समाज तब तक आगे नहीं बढ़ सकता जब तक उसकी बेटियाँ शिक्षा से वंचित रहें। न्यायपालिका, प्रशासन, विद्यालय और परिवार—सभी की जिम्मेदारी है कि हर बेटी को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिले।”

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न्यायमूर्ति रजनेश ओसवाल ने न्यायिक अकादमी की भूमिका पर प्रकाश डाला, जबकि न्यायमूर्ति सिंदू शर्मा ने हर स्तर पर बाल संरक्षण तंत्र को मजबूत करने की आवश्यकता जताई। न्यायमूर्ति मोहम्मद अक़रम चौधरी और न्यायमूर्ति जावेद इक़बाल वानी ने सख्त कानून प्रवर्तन और सिविल सोसाइटी के सहयोग से बेटियों के अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करने का संकल्प दोहराया।

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यूनिसेफ की प्रतिनिधि विजयलक्ष्मी अरोड़ा ने कहा कि यूनिसेफ न्यायपालिका और सरकारी संस्थाओं के साथ मिलकर ऐसे बाल-हितैषी तंत्र के निर्माण के लिए प्रतिबद्ध है, जो हर बच्ची को सुरक्षा, शिक्षा और सशक्तिकरण का अधिकार प्रदान करे।

पुलिस, शिक्षा, स्वास्थ्य और समाज कल्याण विभागों के प्रतिनिधियों तथा विभिन्न स्वयंसेवी संस्थाओं ने भी सम्मेलन में भाग लिया और सामुदायिक पुलिसिंग, सुरक्षित विद्यालय, किशोर स्वास्थ्य और कमजोर वर्ग की सहायता जैसे मुद्दों पर अपने विचार रखे।

सम्मेलन का समापन इस आह्वान के साथ हुआ कि जम्मू-कश्मीर ही नहीं, बल्कि पूरे भारत में ऐसा वातावरण तैयार किया जाए जहाँ हर बच्ची सुरक्षित, शिक्षित और आत्मनिर्भर बनकर अपने सपनों को साकार कर सके।

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