Operation Anveshan: तीन साल बाद घर लौटेगी 12 वर्षीय राजनी, ‘ऑपरेशन अन्वेषण’ ने परिवार से मिलाने की राह की आसान

Operation Anveshan: बोकारो में परिवार से बिछड़ने के बाद करीब तीन साल से बालिका गृह में रह रही 12 वर्षीय रजनी कुमारी (परिवर्तित नाम) की जिंदगी में अब नया मोड़ आया है। लंबे समय से अपने परिवार और घर से दूर रही बच्ची की पहचान और उसके गृह क्षेत्र का पता लगाने में अंतरराज्यीय समन्वय ने अहम भूमिका निभाई है। ओडिशा पुलिस की ‘ऑपरेशन अन्वेषण’ टीम के प्रयासों के बाद रजनी की परिवार में वापसी का रास्ता साफ हुआ है।

तीन साल से बालिका गृह में रह रही थी रजनी

जानकारी के अनुसार, रजनी मूल रूप से ओडिशा के रायगढ़ा क्षेत्र की रहने वाली है। वर्ष 2023 में लापता होने के बाद वह बोकारो में मिली थी। परिवार से संपर्क नहीं हो पाने के कारण उसे बाल संरक्षण व्यवस्था के तहत बालिका गृह, धनबाद में रखा गया था। तब से उसके अपने लोगों तक पहुंचने की कोशिश लगातार जारी थी।

कई प्रयासों के बाद भी नहीं मिल पाया था परिवार का सुराग

बच्ची के परिजनों और उसके मूल निवास की जानकारी जुटाने के लिए जिला बाल संरक्षण इकाई (DCPU), बोकारो तथा बाल कल्याण समिति (CWC), बोकारो की ओर से लगातार प्रयास किए गए। शुरुआती दौर में तमाम कोशिशों के बावजूद परिवार तक पहुंचने में सफलता नहीं मिली। मामला अंतरराज्यीय होने के कारण पहचान और दस्तावेजों के सत्यापन में भी समय लगा।

‘ऑपरेशन अन्वेषण’ से मिली अहम जानकारी

इसी बीच ओडिशा सरकार की ‘ऑपरेशन अन्वेषण’ पहल के तहत पुलिस टीम झारखंड पहुंची। टीम ने बच्ची से जुड़ी जानकारी जुटाने के साथ उसकी पहचान और उपलब्ध दस्तावेजों का मिलान किया। बोकारो के बाल संरक्षण तंत्र तथा बाल कल्याण समिति के साथ समन्वय कर उसके परिवार और गृह क्षेत्र की जानकारी को सत्यापित किया गया।

CWC के आदेश के बाद घर वापसी की प्रक्रिया

सत्यापन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद बाल कल्याण समिति, बोकारो के आदेश के आधार पर बच्ची को उसके गृह राज्य ले जाने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई। इस दौरान बालिका की सुरक्षा और उसके हितों को प्राथमिकता देते हुए आवश्यक औपचारिकताएं पूरी की गईं।

CWC अध्यक्ष ने जताई खुशी

बाल कल्याण समिति, बोकारो की अध्यक्ष श्रीमती लीला देवी ने रजनी की घर वापसी को लेकर खुशी जताई। उन्होंने कहा कि बच्ची को उसके परिवार तक पहुंचाने के लिए पहले भी कई स्तरों पर प्रयास किए गए थे। आखिरकार ‘ऑपरेशन अन्वेषण’ के माध्यम से परिवार का पता लगाने और उसे घर भेजने की प्रक्रिया संभव हो सकी।

परिवार आधारित देखभाल को मिलेगा बढ़ावा

बोकारो में बच्चों को संस्थागत देखभाल के बजाय परिवार आधारित सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराने की दिशा में यूनिसेफ, सीसीआर और एनयूएसआरएल की ओर से तकनीकी सहयोग दिया जा रहा है। बाल कल्याण समिति, जिला बाल संरक्षण इकाई और बाल देखरेख संस्थाओं के बीच बेहतर तालमेल विकसित करने पर जोर है।

अंतरराज्यीय समन्वय बना मिसाल

रजनी का मामला बताता है कि लापता या परिवार से बिछड़े बच्चों को उनके घर तक पहुंचाने में राज्यों के बीच बेहतर तालमेल कितना महत्वपूर्ण है। बोकारो की बाल संरक्षण व्यवस्था और ओडिशा पुलिस के संयुक्त प्रयास से अब तीन साल से परिवार से दूर रही बच्ची के अपने लोगों से मिलने की उम्मीद मजबूत हुई है।

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