Raebareli: भारतीय खाद्य निगम (FCI) गोदाम में वर्षों से मेहनत कर रहे श्रमिकों ने अब कथित शोषण के खिलाफ आवाज बुलंद कर दी है। श्रमिकों ने जिलाधिकारी को शिकायती पत्र देकर ठेकेदारी व्यवस्था में अनियमितताओं की जांच कराने और श्रम कानूनों के तहत मिलने वाले अधिकार दिलाने की मांग की है। श्रमिकों के आरोपों ने एफसीआई गोदाम में कामकाज की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
श्रमिकों का कहना है कि कई कर्मचारी करीब 20 वर्षों से ठेकेदारी व्यवस्था के तहत एफसीआई गोदाम में काम कर रहे हैं, लेकिन इतने लंबे समय तक सेवा देने के बावजूद उन्हें उनकी मेहनत के अनुरूप वेतन और जरूरी सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। शिकायत के मुताबिक कई श्रमिकों की मासिक आय महज 5 से 6 हजार रुपये के आसपास है। महंगाई के दौर में इतनी कम आमदनी में परिवार चलाना उनके लिए किसी चुनौती से कम नहीं है।

श्रमिकों ने आरोप लगाया कि उन्हें वेतन की सैलरी स्लिप, पीएफ, चिकित्सा सुविधा और अन्य श्रम संबंधी लाभ नियमानुसार उपलब्ध नहीं कराए जा रहे हैं। उनका कहना है कि एक ओर उनसे पूरा काम लिया जाता है, वहीं दूसरी ओर उनके अधिकारों और सुविधाओं को लेकर कथित तौर पर लापरवाही बरती जा रही है।
आठ घंटे की ड्यूटी और अतिरिक्त काम का भुगतान मांगा
शिकायत पत्र में श्रमिकों ने ठेकेदारी प्रथा समाप्त कर उन्हें सीधे रोजगार देने, आठ घंटे की ड्यूटी निर्धारित करने तथा अतिरिक्त कार्य का उचित भुगतान करने की मांग की है। इसके साथ ही सामाजिक अवकाश, चिकित्सा सुविधा, पीएफ और अन्य श्रमिक हितकारी सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग भी रखी गई है।
धमकी और दुर्व्यवहार की शिकायत, जांच की मांग
श्रमिकों ने कार्यस्थल पर सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित करने की मांग करते हुए कुछ श्रमिकों के साथ कथित धमकी, दुर्व्यवहार और मारपीट के आरोपों की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि शिकायत करने के बजाय अब उनकी सुरक्षा और सम्मान को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
श्रमिकों ने जिलाधिकारी से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराकर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने तथा एफसीआई गोदाम में कार्यरत श्रमिकों को नियमानुसार वेतन, सुरक्षा, सम्मान और सभी वैधानिक सुविधाएं दिलाने की मांग की है। अब प्रशासन की जांच और कार्रवाई पर श्रमिकों की निगाहें टिकी हैं।










