Raebareli: रायबरेली जिला सांसद एवं नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी (Rahul Gandhi) की अध्यक्षता में हुई दिशा की बैठक में जिले की बदहाल सड़कों का मुद्दा उठाए जाने के बाद एक बार फिर मैनूपुर गांव की सड़क चर्चा में आ गई है। सदर तहसील क्षेत्र के अमावां ब्लॉक स्थित मैनूपुर गांव के ग्रामीणों ने सड़क की बदहाली को लेकर विरोध प्रदर्शन किया। ग्रामीणों ने अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों और जिम्मेदार विभागों के खिलाफ जमकर नारेबाजी करते हुए सड़क निर्माण की मांग उठाई।
मैनूपुर वही गांव है, जो वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान पूरे जिले में खासा चर्चित हुआ था। मतदान के दिन सड़क की बदहाली समेत अन्य समस्याओं को लेकर ग्रामीणों ने मैनूपुर बूथ पर मतदान का बहिष्कार कर दिया था। मामला इतना तूल पकड़ गया था कि तत्कालीन लोकसभा प्रत्याशी राहुल गांधी स्वयं गांव के बूथ स्थल पर पहुंचे थे। भाजपा प्रत्याशी एवं प्रदेश सरकार के मंत्री दिनेश प्रताप सिंह भी ग्रामीणों को समझाने पहुंचे थे। इसके अलावा सदर विधायक अदिति सिंह और सपा प्रत्याशी राम प्रताप यादव ने भी ग्रामीणों से मतदान में हिस्सा लेने की अपील की थी।

बताया जाता है कि काफी देर तक ग्रामीण अपनी मांग पर अड़े रहे। इसके बाद राहुल गांधी के ग्रामीणों को समझाने के बाद शाम करीब 5:30 बजे मतदान शुरू हो सका था। उस समय सड़क की समस्या को लेकर जल्द समाधान का भरोसा दिया गया था। ग्रामीणों का आरोप है कि चुनाव के दौरान किए गए वादे के बावजूद करीब दो साल बीतने के बाद भी सड़क की तस्वीर नहीं बदली है।
ग्रामीणों के मुताबिक करीब 20 वर्षों से सड़क बदहाल हालत में है। वर्ष 2004 में सड़क का निर्माण कराया गया था, लेकिन इसके बाद नियमित मरम्मत और पुनर्निर्माण पर जिम्मेदारों ने ध्यान नहीं दिया। हालत यह है कि सड़क पर जगह-जगह बड़े और गहरे गड्ढे हो चुके हैं, जिनसे आए दिन हादसे का खतरा बना रहता है। बरसात के दौरान गड्ढों में पानी भर जाने से सड़क और भी खतरनाक हो जाती है।
विरोध प्रदर्शन में कौशल किशोर मिश्रा, अंबिका प्रसाद मिश्रा, पूर्व प्रधान समेत सैकड़ों ग्रामीण एकत्र हुए। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क निर्माण को लेकर प्रक्रिया आगे बढ़ चुकी है और सड़क पास भी बताई जा रही है, लेकिन जिला पंचायत की ओर से एनओसी नहीं मिलने का हवाला दिया जा रहा है। वहीं दूसरी ओर बजट उपलब्ध न होने की बात भी कही जा रही है। ग्रामीणों का सवाल है कि यदि सड़क स्वीकृत है तो आखिर निर्माण शुरू होने में कौन सी बाधा है और उसके समाधान के लिए जिम्मेदार विभाग गंभीर क्यों नहीं है?
ग्रामीणों ने कहा कि चुनाव के समय जिस सड़क ने पूरे प्रदेश का ध्यान अपनी ओर खींचा था, वही सड़क आज भी अपनी बदहाली पर आंसू बहा रही है। दिशा की बैठक में जिले की खराब सड़कों का मुद्दा उठने के बाद ग्रामीणों को उम्मीद जगी थी कि अब मैनूपुर की सड़क का भी कायाकल्प होगा, लेकिन जमीनी स्थिति जस की तस बनी हुई है।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द सड़क निर्माण की प्रक्रिया शुरू नहीं की गई तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। अब देखना यह है कि मैनूपुर की सड़क को लेकर वर्षों से चली आ रही समस्या कब खत्म होती है और चुनावी वादे से लेकर सरकारी फाइलों तक सीमित रही सड़क धरातल पर कब दिखाई देती है।










