रामगढ़: हजारीबाग टाउन रेलवे स्टेशन में तैनात रेलवे सुरक्षा बल (RPF) के अधिकारियों और जवानों पर युवकों के साथ कथित मारपीट, अभद्र व्यवहार और धमकी देने का मामला सामने आया है। रामगढ़ जिले के कुजू निवासी शिवा प्रसाद ने इस संबंध में आरपीएफ के आईजी, हाजीपुर को लिखित शिकायत भेजकर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। हालांकि, आरपीएफ ने शिकायत में लगाए गए आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे बेबुनियाद बताया है।
खेत में गए युवकों को रोकने से शुरू हुआ विवाद

शिवा प्रसाद की ओर से भेजे गए आवेदन के मुताबिक, 15 अगस्त को कुजू रेलवे स्टेशन के आसपास स्थित खेत में कुछ युवक शौच के लिए गए थे। इसी दौरान नाबालिग पवन कुमार के साथ आरपीएफ जवानों द्वारा कथित तौर पर मारपीट किए जाने की सूचना शिवा प्रसाद को मिली। सूचना मिलने के बाद वह मौके पर पहुंचे। शिकायतकर्ता का आरोप है कि वहां पहुंचने के बाद आरपीएफ कर्मियों ने उनके साथ भी कथित रूप से दुर्व्यवहार किया।
युवकों को हजारीबाग टाउन स्टेशन ले जाने का आरोप
शिकायत में कहा गया है कि घटना के बाद शिवा प्रसाद, पवन कुमार और अन्य युवकों को आरपीएफ कर्मियों ने हिरासत में लिया और हजारीबाग टाउन रेलवे स्टेशन ले गए। वहां सभी युवकों को रखा गया। शिवा प्रसाद ने अपने आवेदन में आरपीएफ इंस्पेक्टर बाल गोविंद गंगाधर, सब इंस्पेक्टर अमित कुमार तथा जवान देवेंद्र भारती, उमाशंकर सिंह और अभय सिंह सहित अन्य कर्मियों पर मारपीट और कथित अभद्र व्यवहार करने का आरोप लगाया है।
आईजी से जांच और कार्रवाई की मांग
शिकायतकर्ता ने मामले को गंभीर बताते हुए आरपीएफ के वरिष्ठ अधिकारियों से पूरे घटनाक्रम की जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि जांच के बाद यदि लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित कर्मियों के खिलाफ नियम के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए।
आरपीएफ ने आरोपों को बताया बेबुनियाद
वहीं, मामले में आरपीएफ इंस्पेक्टर बाल गंगाधर सिंह ने दूरभाष पर लगाए गए आरोपों को गलत और बेबुनियाद बताया। उनके अनुसार, यह पूरा मामला रेलवे केबल चोरी से जुड़ा हुआ है। आरपीएफ टीम इलाके में इसी मामले की छानबीन कर रही थी। इसी दौरान टीम को देखकर तीन युवक वहां से भागने लगे।
पूछताछ के लिए हिरासत में लेने की बात
आरपीएफ अधिकारी के मुताबिक, भाग रहे युवकों को पूछताछ के उद्देश्य से हिरासत में लिया गया था। उन्होंने कहा कि कार्रवाई के दौरान किसी युवक के साथ मारपीट या अभद्र व्यवहार नहीं किया गया। आरपीएफ ने शिकायत में लगाए गए धमकी देने के आरोपों से भी इनकार किया है।
जांच के बाद ही साफ होगी पूरी तस्वीर
फिलहाल एक ही घटना को लेकर शिकायतकर्ता और आरपीएफ की ओर से अलग-अलग दावे सामने आए हैं। शिकायतकर्ता ने जहां कथित मारपीट और दुर्व्यवहार का आरोप लगाया है, वहीं आरपीएफ इसे रेलवे केबल चोरी की जांच के दौरान की गई नियमानुसार कार्रवाई बता रही है। ऐसे में निष्पक्ष जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि घटना के दौरान वास्तव में क्या हुआ था।










